सिकरवार, निमुड़ी,गौतम,नन्दबक,चन्दौसिया राजपूतो का संक्षिप्त इतिहास

Sikwar (सिकरवार) rajput:-

यह सूर्यवंशी हैं। गोत्र-भारद्वाज। प्रवर-३ (ीन) भारद्वाज, अनिरसवाईस्पत्य। वेद-सामवेद । शाखा-कोयुमी। सूत्र गोभिल ग्रह्मसूत्र है । कुलदेवी-दुगजी। देवता-विष्णुजी हैं । यह अपने को श्री रामचन्द्रजी के पुत्र लव की सन्तान मानते हैं । वह राजस्थान पृष्ठ ३०७ प्रकरण सातवे में लिखा है। कि सि करवाल ऐसा जान पड़ता है कि यह वंश भी उपरोक्त वंश की तरह राजस्थान के राजाओं के मध्य कभी प्रसिद्ध नहीं हुआ है । और न इस जाति (सिकरवालका राजा एक भी स्वतन्त्र राज्य अवशेष नहीं है । यद्यपि एक छोटा सा इलाका चम्बल नदी के दाहिने किनारे पर यदुवारी की तरफ सिन्धिया के राज्यान्तर्गत ग्वालियर के इलाके में मिल गया है उनका यह नाम सीकरी फतेहूपुरके निवास के कारण पड़ा है । जो पूर्वकाल में एक स्वतन्त्र राज्य था। इनका विवाह सम्बन्ध प्रायः क्षत्रियों में होता है ।

Nimudi निमुड़ी rajput:-

सूर्यवंश में राजा इक्ष्वाकु हुए थे, उनसे निमि राजा हुए थे। जिनके नाम से निमुड़ी संज्ञा हुई है । यह प्राचीन राजवंश है, परन्तु इस समय इनकी कोई राजधानी नहीं है। इसलिए मान मर्यादा की दृष्टि से नहीं देखे जाते हैं। इस वंश का विवाह सम्बन्ध स्थान भेद से क्षत्रियों में होता है। यह वंश प्रायः उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में निवास करता है कुछ बिहार में भी निवास करते हैं ।


Gotam (गौतम) rajput:-

इस वंश को वंश-भास्कार में सूर्यवंश कहा गया है और इस वंश वाले भी इसे मानते हैं । फतेहपुर जिला के निकट अगरला' प्रसिद्ध गाँव है, यहों पर इस वंश में गौतम नाम का जागीरदार हुआ था जिसकी ख्याति इतिहास में पाई जाती है कि इस राजा ने मुसलमानों से लड़कर उनको खूब मारा था और उसकी रानी ने अपनी मानमर्यादा बचाने के लिए बड़ी बीरता दिखाई थी। इस वंश के घराने इस प्रकार हैं ।राजा राणा, राजा रावतराय इत्यादि।


Nandbak (नन्दबक) rajput:-

यह लोग अपने को नरराव ( अलबर ) के कछवायों के बंशज मानते हैं जोकि सूर्यवंशी हैं। जौनपुर, आजमगढ़ बलिया, मिर्जापुर आदि जिलों में निवास करते हैं। विवाह स्थान भेद से प्रत्येक क्षत्रिय वर्ग से होता है ।

Chandosiya (चन्दौसिया) rajput:-

यह लोग अपने को बैस क्षत्रियों की शाखा मानते हैं । इस बंश के संस्थापक ठा० उदय बुद्धसिह हुए हैं । जो बैंसबाड़ा से चन्दौर ग्राम सुल्तानपुर में जा बसे हैं, जिससे चन्दसिया कहलाये हैं । इन विवाह-सम्बन्ध प्रत्येक क्षत्रीय वर्ग में होते है ।


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